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जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #माघी पूर्णिमा व्रत कथा
माघी पूर्णिमा व्रत कथा - व्रत कथ @ಣ "arl M माघी पूर्णिमा व्रत कथा II I 3 $ धनेश्वर पीराणिक कथा के अनुसार, कांतिकानगर में नाम का ब्राह्मण निवास करता थाः वह अपना जीवन निर्वाह दान पर करता था॰ ब्राह्यण ओर उसकी पत्नी 9 ०की कोई संतान नहीं थी॰ एक दिन उसूकी पत्नी नगर 5 मे भिक्षा मांगने गई लेकिन सभी ने उसे बांझ कहकर 8वै भिक्षा देने से इनकार कर दिया॰ तब किसी ने ब्राह्मण की पत्नी से १६ दिन तक काली मां कीटपूजा करने को कहा ओर उसके कहने पर ब्राह्यण दंपत्ति ने ऐसा ही कियाः उनकी प्रसन्न होकर मां काली आसथना से हुई ओर उस ब्राह्मण कीपत्नी को गर्भवती होने 7 कट का वरदान दिया ओर कहा कि अपने सामर्थ्य अनुसार 3 Wuia? को एक दीपक जलाओ॰ इस तरह हर 6 గౌ दिन एक दीपक बढ़ाती जाना जब तक पूर्णिमा ० कमी से॰कम ३२ दीप्क ने हो जाएं॰ ब्राह्यण ने अपनी लिए पेडसे कच्च तोड़कर पत्नी को पजा के VH ಕ್ಲಿ दियाः उसकी पत्नीनेप्रजा कीओर फलस्वरूप ೯೯ गर्भवती हो गईः बह प्रत्येक कोमां काली gfo कहे अनुसार दीपक जलाती रही॰ मां काली की कृपा से उसके घरमें एक पुत्रने जन्म लिया जिसका नाम देवदास रखा गया॰ देवदास जब बड़ा எ काशहॅँ आजता गयसन fre अपने मामा केसाथ पढने के $ 9 घटी जिसके कारण थोखे से दुर्घटना बह पर एक देवदास का विवाहहो गया. देवदास ने कहा कि चह अल्पायु हेःलेकिन फिरभी जबर उसका विवाह कय ० दिया गँया. कुछ समय बाद काल देवदास के प्राण लेने ಕ नेहपूर्षिगा क आए लेकिन बराह्यण दंपत्ति ಕ್ಲಿ थे M ಹn Kel पायाः तथी इसलिए काल उसका कुछ कहा जाता हकि पूर्णिमा के दिन व्रत करने सेसभी संकटों से मुक्ति मिलती ह ओर मनोकामनाएं पूरी ನri ೯: व्रत कथ @ಣ "arl M माघी पूर्णिमा व्रत कथा II I 3 $ धनेश्वर पीराणिक कथा के अनुसार, कांतिकानगर में नाम का ब्राह्मण निवास करता थाः वह अपना जीवन निर्वाह दान पर करता था॰ ब्राह्यण ओर उसकी पत्नी 9 ०की कोई संतान नहीं थी॰ एक दिन उसूकी पत्नी नगर 5 मे भिक्षा मांगने गई लेकिन सभी ने उसे बांझ कहकर 8वै भिक्षा देने से इनकार कर दिया॰ तब किसी ने ब्राह्मण की पत्नी से १६ दिन तक काली मां कीटपूजा करने को कहा ओर उसके कहने पर ब्राह्यण दंपत्ति ने ऐसा ही कियाः उनकी प्रसन्न होकर मां काली आसथना से हुई ओर उस ब्राह्मण कीपत्नी को गर्भवती होने 7 कट का वरदान दिया ओर कहा कि अपने सामर्थ्य अनुसार 3 Wuia? को एक दीपक जलाओ॰ इस तरह हर 6 గౌ दिन एक दीपक बढ़ाती जाना जब तक पूर्णिमा ० कमी से॰कम ३२ दीप्क ने हो जाएं॰ ब्राह्यण ने अपनी लिए पेडसे कच्च तोड़कर पत्नी को पजा के VH ಕ್ಲಿ दियाः उसकी पत्नीनेप्रजा कीओर फलस्वरूप ೯೯ गर्भवती हो गईः बह प्रत्येक कोमां काली gfo कहे अनुसार दीपक जलाती रही॰ मां काली की कृपा से उसके घरमें एक पुत्रने जन्म लिया जिसका नाम देवदास रखा गया॰ देवदास जब बड़ा எ काशहॅँ आजता गयसन fre अपने मामा केसाथ पढने के $ 9 घटी जिसके कारण थोखे से दुर्घटना बह पर एक देवदास का विवाहहो गया. देवदास ने कहा कि चह अल्पायु हेःलेकिन फिरभी जबर उसका विवाह कय ० दिया गँया. कुछ समय बाद काल देवदास के प्राण लेने ಕ नेहपूर्षिगा क आए लेकिन बराह्यण दंपत्ति ಕ್ಲಿ थे M ಹn Kel पायाः तथी इसलिए काल उसका कुछ कहा जाता हकि पूर्णिमा के दिन व्रत करने सेसभी संकटों से मुक्ति मिलती ह ओर मनोकामनाएं पूरी ನri ೯: - ShareChat