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#✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक
✍प्रेमचंद की कहानियां - 56 মুসবী मनृष्य जब तक कै दृःख को देखकर विचलित नहीं होता, तब तक उसकी संवेदनाएँ जीवित नहीं कही जा सकतीं | जिस समाज में करुणा मर जाती है॰ वहाँ केवल 9٨؟ बचती है॰ मनुष्य नहीं | मुंशी प्रेमचंद 56 মুসবী मनृष्य जब तक कै दृःख को देखकर विचलित नहीं होता, तब तक उसकी संवेदनाएँ जीवित नहीं कही जा सकतीं | जिस समाज में करुणा मर जाती है॰ वहाँ केवल 9٨؟ बचती है॰ मनुष्य नहीं | मुंशी प्रेमचंद - ShareChat