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✍️ साहित्य एवं शायरी - "तजुरबा कहता है बेहतर  खामोशियाँ ही 8, अल्फाजो से लोग रूठते बहुत हैं..." जिंदगी गुजर गयी... सबको खुश करने में .. जो खुश हुए वो अपने नहीं थे,| जो अपने थे वो कभी खुश नहीं हुए॰.. कितना भी समेट लो. . हाथों से फिसलता जरूर है. ये वक्त है साहब. *बदलता ज़रूर है. "तजुरबा कहता है बेहतर  खामोशियाँ ही 8, अल्फाजो से लोग रूठते बहुत हैं..." जिंदगी गुजर गयी... सबको खुश करने में .. जो खुश हुए वो अपने नहीं थे,| जो अपने थे वो कभी खुश नहीं हुए॰.. कितना भी समेट लो. . हाथों से फिसलता जरूर है. ये वक्त है साहब. *बदलता ज़रूर है. - ShareChat