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#⚖️शरजील-उमर को SC से नहीं मिली जमानत
⚖️शरजील-उमर को SC से नहीं मिली जमानत - கௌு सच्ची बात बैधड़क दिल्ली दंगा; सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील को जमानत देने से इनकार किया... बाकी 5 को दी भास्कर न्यूज. नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को २०२० के दिल्ली दंगों में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। सोची-समझी रणनीति ) मामले से जुड़े লভী সানিহা' गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यूएपीए  के तहत ये आरोपी बनाए गए थे। हालांकि, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन॰ वी॰ अंजारिया की पीठ ने 5 अन्य आरोपियों ( गुल्फिशा फातिमा, मीरान हैदर , शिफा उर रहमान, शादाब को जमानत दे दी। अहमद व मोहम्मद सलीम खान शरजील इमा उमर खालिद कोर्ट ने कहा- सातों आरौपी दौषसिद्धि में समान स्तर पर नहीं हैं उमर और शरजील पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए बेल नहीः एक्सपर्टत्यू भास्कर न्यूज | नईदिल्ली  दिल्ली दंगा मामले में जमानत पर सुनवाई करते विवेक तन्खा, सीनियर एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सातों आरोपी दोषसिद्धि ट्रायल पूरा करने को 1 साल दिया है की दृष्टि से समान स्तर पर नहीं हैं, इसलिए प्रत्येक आरोपी की जमानत याचिका की अलग-्अलग जांच किसी भी मामले में जब किसी आरोपी को जेल में रहते हुए की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा, यह न्यायालय ५ या 8 साल हो जाते हैं और उसकी अपील लंबित रहती है संतुष्ट है कि अभियोजन सामग्री अपीलकर्ताओं   तो सुप्रीम कोर्ट मामले को गंभीरता देखते हुए आए दिन इसी उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम किस्म का फैसला करता है। कोर्ट ट्रायल को जल्दी व तय दृष्टया आरोप को उजागर करती है। वैधानिक सीमा समय में पूरा करने के आदेश देता है। एक तरह से सुप्रीम इन अपीलकर्ताओं पर लागू होती है। कार्यवाही के कोर्ट ने ट्रायल की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक वर्ष का इस चरण में उन्हें जमानत देना उचित नहीं है। ' समय तय किया है ताकि यदि एक वर्ष में भी ट्रायल पूरा नहीं हालांकि,. कोर्ट ने यह भी कहा कि संरक्षित   हुआ तो वह फिर से इस मामले पर पुनर्विचार कर सरकता है गवाहों की जांच पूरी होने पर या इस आदेश का एक अनुच्छेद २१ के मुताबिक बिना ट्रायल के किसी भी आरोपी साल पूरा होने के बाद उमर और शरजील दोबारा को हमेशा के लिए तो जेल में नहीं रखा जा सकता। जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। खालिद व ೫ಠಣಾಾ आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर अन्य मामला , जिसमें 5 साल के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया से जेल में बंद हैं उमर व शरजील था, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया সিননং ক্ষী হল সামল স ন 22 था। शीर्ष अदालत फरवरी २०२० में तत्कालीन प्रस्तावित नागरिकता दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। पुलिस ने हुई झड़पों के संशोधन अधिनियम ( सीएए ক্রা লন্ধয एक हलफनामा दायर कर कहा कि ` शासन परिवर्तन दंगे हुए { बाद दिल्ली थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार , इनमें अभियान ৯ লিব সানিহা; सांप्रदायिक आधार [ हुई और सैकड़ों घायल हुए। उमर ५३ लोगों की मौत पर देशव्यापी दंगे भड़काने और गैर-मुसलमानों खालिद को सितंबर २०२० में गिरफ्तार किया गया था। की हत्या की साजिशों की ओर इशारा करने वाले मौजूद हैं। शरजील को जनवरी २०२० में पकड़ लिया गया था। अकाट्य दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य கௌு सच्ची बात बैधड़क दिल्ली दंगा; सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील को जमानत देने से इनकार किया... बाकी 5 को दी भास्कर न्यूज. नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को २०२० के दिल्ली दंगों में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। सोची-समझी रणनीति ) मामले से जुड़े লভী সানিহা' गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यूएपीए  के तहत ये आरोपी बनाए गए थे। हालांकि, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन॰ वी॰ अंजारिया की पीठ ने 5 अन्य आरोपियों ( गुल्फिशा फातिमा, मीरान हैदर , शिफा उर रहमान, शादाब को जमानत दे दी। अहमद व मोहम्मद सलीम खान शरजील इमा उमर खालिद कोर्ट ने कहा- सातों आरौपी दौषसिद्धि में समान स्तर पर नहीं हैं उमर और शरजील पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए बेल नहीः एक्सपर्टत्यू भास्कर न्यूज | नईदिल्ली  दिल्ली दंगा मामले में जमानत पर सुनवाई करते विवेक तन्खा, सीनियर एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सातों आरोपी दोषसिद्धि ट्रायल पूरा करने को 1 साल दिया है की दृष्टि से समान स्तर पर नहीं हैं, इसलिए प्रत्येक आरोपी की जमानत याचिका की अलग-्अलग जांच किसी भी मामले में जब किसी आरोपी को जेल में रहते हुए की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा, यह न्यायालय ५ या 8 साल हो जाते हैं और उसकी अपील लंबित रहती है संतुष्ट है कि अभियोजन सामग्री अपीलकर्ताओं   तो सुप्रीम कोर्ट मामले को गंभीरता देखते हुए आए दिन इसी उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम किस्म का फैसला करता है। कोर्ट ट्रायल को जल्दी व तय दृष्टया आरोप को उजागर करती है। वैधानिक सीमा समय में पूरा करने के आदेश देता है। एक तरह से सुप्रीम इन अपीलकर्ताओं पर लागू होती है। कार्यवाही के कोर्ट ने ट्रायल की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक वर्ष का इस चरण में उन्हें जमानत देना उचित नहीं है। ' समय तय किया है ताकि यदि एक वर्ष में भी ट्रायल पूरा नहीं हालांकि,. कोर्ट ने यह भी कहा कि संरक्षित   हुआ तो वह फिर से इस मामले पर पुनर्विचार कर सरकता है गवाहों की जांच पूरी होने पर या इस आदेश का एक अनुच्छेद २१ के मुताबिक बिना ट्रायल के किसी भी आरोपी साल पूरा होने के बाद उमर और शरजील दोबारा को हमेशा के लिए तो जेल में नहीं रखा जा सकता। जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। खालिद व ೫ಠಣಾಾ आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर अन्य मामला , जिसमें 5 साल के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया से जेल में बंद हैं उमर व शरजील था, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया সিননং ক্ষী হল সামল স ন 22 था। शीर्ष अदालत फरवरी २०२० में तत्कालीन प्रस्तावित नागरिकता दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। पुलिस ने हुई झड़पों के संशोधन अधिनियम ( सीएए ক্রা লন্ধয एक हलफनामा दायर कर कहा कि ` शासन परिवर्तन दंगे हुए { बाद दिल्ली थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार , इनमें अभियान ৯ লিব সানিহা; सांप्रदायिक आधार [ हुई और सैकड़ों घायल हुए। उमर ५३ लोगों की मौत पर देशव्यापी दंगे भड़काने और गैर-मुसलमानों खालिद को सितंबर २०२० में गिरफ्तार किया गया था। की हत्या की साजिशों की ओर इशारा करने वाले मौजूद हैं। शरजील को जनवरी २०२० में पकड़ लिया गया था। अकाट्य दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य - ShareChat