मैं जब तारों को देखती हूँ, तो लगता है---
भीड़ में कितने सहज हैं, सरल हैं और विनम्र भी।
मेरी हर बात ऐसे सुनते हैं, जैसे ये ही मेरा ही हिस्सा हों।
हर दिन मैं इन्हें शब्दों में ढालती हूँ,
लेकिन ये इतने विस्तृत हैं कि मेरी कल्पनाओं की दुनिया छोटी हो जाती है।
मैं मुस्कुराती हूँ, कुछ पल ठहर जाती हूँ और फिर----
छोड़ देती हूँ उन्हें उनकी भीड़ में तन्हा, ये कहकर,
कल फिर आंऊगी तुम्हें अपनी कल्पनाओं में समेटने।
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #😘बस तुम और मैं #💓 मोहब्बत दिल से #सिर्फ तुम #🌙 गुड नाईट


