ShareChat
click to see wallet page
search
भगवान उवाच: *यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान्।* *तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय।।6।।* जैसे आकाश से उत्पन्न सर्वत्र विचरने वाला महान वायु सदा आकाश में ही स्थित है, वैसे ही  मेरे संकल्प द्वारा उत्पन्न होने से सम्पूर्ण भूत मुझमें स्थित हैं, ऐसा जान। *(श्लो 6 अध. 09भगवत गीता)* *🙏🌹 शुभ प्रभात १🌹 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 *
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मैं ईश्वर के हर निर्णय पर प्रसन्न हू পীভা aFi ಹ क्योंकि उसने सहने श्रेणी में रखा है பs देने वालों की ना कि मैं ईश्वर के हर निर्णय पर प्रसन्न हू পীভা aFi ಹ क्योंकि उसने सहने श्रेणी में रखा है பs देने वालों की ना कि - ShareChat