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कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे कभी सुख कभी दुख, यही ज़िंदगी हैं ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी हैं नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से #😘बस तुम और मैं #🌙 गुड नाईट #सिर्फ तुम
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - कहाँ तक ये मन को अधेरे छलेंगे उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे कभी सुख कभी दुख, यही ज़िंदगी हैं ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी हैं नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे कहाँ तक ये मन को अधेरे छलेंगे उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे कभी सुख कभी दुख, यही ज़िंदगी हैं ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी हैं नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे - ShareChat