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#जय श्री कृष्णा
जय श्री कृष्णा - कोई साथ देना न चाहे, साथ जब चलना ही न चाहे, तो मन में यह भाव न उठे "उसके बिना मैं अधूरा हूँ" या "मैं कमजोर हूँ।" बल्कि मन कहे साथ देःयान दे, "चह मैं अकेला ही पर्याप्त हूँ। मेरी शांति का आधार स्वयं में है।" यहीं से मुक्त प्रेम और सच्ची शांति जन्म लेती है। होने यान होने से मन की साथ स्थिति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। कोई साथ देना न चाहे, साथ जब चलना ही न चाहे, तो मन में यह भाव न उठे "उसके बिना मैं अधूरा हूँ" या "मैं कमजोर हूँ।" बल्कि मन कहे साथ देःयान दे, "चह मैं अकेला ही पर्याप्त हूँ। मेरी शांति का आधार स्वयं में है।" यहीं से मुक्त प्रेम और सच्ची शांति जन्म लेती है। होने यान होने से मन की साथ स्थिति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। - ShareChat