ShareChat
click to see wallet page
search
🎤 अम्बेडकर का संविधानवाद बनाम मनुवादी–सामंतवादी विचारधारा (भाग–4, सर्वाधिक प्रभावशाली विस्तार) साथियो… अम्बेडकर ने जिस भारत का सपना देखा था, वह न्याय पर आधारित भारत था, जहाँ किसी की छत टूटे या किसी की ज़मीन छीने — उसकी जाति देखकर फैसला न हो, बल्कि कानून देखकर फैसला हो। लेकिन सामंतवाद और मनुवाद कानून को नहीं मानता — वह सिर्फ जन्म की कथित श्रेष्ठता को मानता है। --- 🔥 मनुवादी सोच ने भारत को सदियों पीछे धकेला हम यह क्यों भूल जाते हैं कि मनुवादी व्यवस्था ने भारत को कई शताब्दियों तक दुनिया की दौड़ से बाहर कर दिया? जब बाकी देश विज्ञान में आगे बढ़ रहे थे, तब समाज जाति की दीवारों में उलझा था। जब दुनिया शिक्षा को हथियार मान रही थी, तब भारत में शिक्षा कुछ परिवारों की “जागीर” थी। जब अन्य देशों ने लोकतंत्र का बीज बोया, तब यहाँ मनुवाद ने समाज को ऊँचा-नीचा, छुआ-अछूत, और श्रमिक-शासक में बाँट दिया। इसीलिए बाबासाहेब ने कहा था— “भारत गरीब इसलिए नहीं है कि उसे ईश्वर ने गरीब बनाया, भारत गरीब है क्योंकि उसकी सामाजिक व्यवस्था अन्यायपूर्ण है।” --- 🛡️ संविधानवाद: समाज को जोड़ने की शक्ति संविधानवाद कहता है: हर बच्चा बराबर है हर इंसान बराबर है हर नागरिक बराबर है और इसी सोच के कारण— भारत आज लोकतंत्र है, ना कि किसी जाति, कुल या खानदान की “निजी संपत्ति।” संविधानवाद ने ही SC, ST, OBC, महिलाओं, अल्पसंख्यकों— हर कमजोर वर्ग को आवाज़ दी है। --- 📢 लेकिन मनुवादी ताकतों की परेशानी क्या है? साथियो… मनुवादी ताकतों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अम्बेडकरवाद ने सदियों से दबे लोगों को मैं भी इंसान हूँ यह एहसास दिला दिया है। और यही उनकी राजनीति के लिए खतरा है। क्योंकि— जब बहुजन जागता है, तब मनुवादी सत्ता हिलती है। जब बहुजन पढ़ता है, तब मनुवादी ढाँचा टूटता है। जब बहुजन राजनीतिक रूप से जागरूक होता है, तब मनुवादी वर्चस्व समाप्त होता है। इसीलिए आज भी अम्बेडकरवादी विचारों को कमजोर करने की कोशिश की जाती है। --- 🏛️ संविधानवाद आज के दौर में क्यों ज़रूरी है? क्योंकि आज भी: आरक्षण को निशाना बनाया जाता है SC-ST की नौकरियों को काटा जाता है OBC की गणना रोकने की कोशिश होती है सामाजिक न्याय की नीतियों को “तुष्टिकरण” कहा जाता है बहुजन युवाओं की आवाज़ को दबाया जाता है और गरीब, पिछड़े, दलित युवाओं के सपनों को “योग्यता की कमी” कहकर कुचला जाता है साथियो, यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। यह 21वीं सदी में भी जारी है। इसीलिए बाबासाहेब के विचारों का मूल्य आज और बढ़ गया है। --- 🧭 भारत किस दिशा में जाएगा? — यह इस लड़ाई पर निर्भर है अगर संविधानवाद मजबूत होगा — तो आरक्षण सुरक्षित रहेगा सामाजिक न्याय आगे बढ़ेगा प्रतिनिधित्व बढ़ेगा जाति-विरोधी सोच मजबूत होगी भारत वैज्ञानिक और आधुनिक देश बनेगा लेकिन अगर मनुवाद मजबूत हुआ — तो आरक्षण पहले कमजोर होगा फिर प्रतिनिधित्व खत्म होगा फिर बहुजन को सत्ता से बाहर किया जाएगा फिर शिक्षा और नौकरियाँ कुछ हाथों में सिमट जाएँगी यही मनुवादी राजनीति का एजेंडा रहा है। --- 📣 साथियो, अब अंतिम सवाल आपसे! आप कौन सा भारत चाहते हैं? ✔ वह भारत जहाँ अम्बेडकरवाद हो, जहाँ बराबरी हो, जहाँ सम्मान हो, जहाँ कानून सबके लिए बराबर हो? ✘ या वह भारत जहाँ मनुवाद हो, जहाँ जन्म तय करे कि इंसान कितना “ऊँचा” है, जहाँ मजदूर का बेटा मजदूर ही रहेगा, और शासक का बेटा शासक ही बनेगा? यह फैसला आपकी चेतना तय करेगी। आपकी एकता तय करेगी। आपकी समझ तय करेगी। --- 🔥 समाप्ति: एक क्रांतिकारी संदेश साथियो… अम्बेडकरवाद सिर्फ इतिहास नहीं— यह भारत का भविष्य है। और मनुवाद सिर्फ अतीत नहीं— यह वह खतरा है जिसे अगर पहचाना नहीं गया, तो भविष्य को जकड़ लेगा। याद रखिए— संविधान हमारा हथियार है। और अम्बेडकर हमारी रोशनी। #✍🏻भारतीय संविधान📕 #😛 व्यंग्य 😛 #❤️जीवन की सीख #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान