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#📖 कविता और कोट्स✒️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #✍️ साहित्य एवं शायरी #🥰Express Emotion
📖 कविता और कोट्स✒️ - लकीरें लकीरें हाथ में थीं तो मुकद्दर थीं इन्हें हम बन्द रखते थे ज़मीनों पर बिछीं तो फिर समन्दर, मुलक, आंगन सभी र घर, काटती गुज़रीं ! लकीरें ज़िन्दा रहती हैं लकीरें सांस लेती हैं लकीरों पर पडे़े पांव, तो पांव काट देती हैं लकीरें रेंगती हैं रती ऐ जब तो सांपों की तरह ये केंचुली अपनी  लकीरें लकीरें हाथ में थीं तो मुकद्दर थीं इन्हें हम बन्द रखते थे ज़मीनों पर बिछीं तो फिर समन्दर, मुलक, आंगन सभी र घर, काटती गुज़रीं ! लकीरें ज़िन्दा रहती हैं लकीरें सांस लेती हैं लकीरों पर पडे़े पांव, तो पांव काट देती हैं लकीरें रेंगती हैं रती ऐ जब तो सांपों की तरह ये केंचुली अपनी - ShareChat