ShareChat
click to see wallet page
search
मैंने अपनों से सीखा है धोखा खाना, कमबख़्त बहुत दर्दनाक है ऐ-ज़माना। मजम'-ए-ख़िलाफ़-ए-क़ानून जब बुनता, फिर उसे मुंतशिर करता है ख़ुद फ़साना। पत्थरों-सा बरसते हैं हालात के तूफ़ान, कैसे बच पाएगा शीशा-सा परवाना। रहनुमाई का जो दावेदार बना अक्सर, उसने ही लूटा है बेक़स का ख़ज़ाना। सच यहाँ बोलना गुनाहों से भी भारी, झूठ ही सरताज, सच्चा है बेगाना। क़ातिलों के सभी चेहरे हैं अपने-जैसे, ख़ून से सींचा है रिश्तों का तराना। दिल ने सब रिश्तों के नक़ाब फाड़ दिए, अब ग़ज़ल ही है मेरी मौत का बहाना। #💔मरीज-ए-इश्क❤ #नज़्म की दुनियां 🎻📖🖊️ #💝 इज़हार-ए-मोहब्बत #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #📒 मेरी डायरी