ShareChat
click to see wallet page
search
#भागवत पुराण #🙏भक्ती सुविचार📝 #☺️उच्च विचार #😇भक्ती स्टेट्स #👍लाईफ कोट्स
भागवत पुराण - அ7ர 3அஙq 12: भक्ति का श्रेष्ठ मार्ग कौन सा है?  पूछते हैं कि यह इन्फोग्राफिक अर्जुन की जिज्ञासा से शुरू होता है, जिसमें वे भगवान  தனர் कौन श्रेष्ठ है ~ जो आपके साकार (सगुण) रूप की पूजा करते हैं, या जो आपके अविनाशी, निराकार (निर्गुण) रूप की उपासना करते हैं? इन्फोग्राफि कृष्ण के उत्तर को सारांशित करता है। निर्गुण उपासना सगुण उपासना কী পুচা) की पूजा) (निराकार रूप (साकार रूप जो भक्त मन को मुझमें एकाग्र करके  जो इंद्रियों को वश में करके अविनाशी परम श्रद्धा से मेरी पूजा करते हैं। सर्वव्यापी और अचिन्त्य ब्रह्य की उपासना करते है। निराकार मार्ग भगवान का निर्णयः अधिक कठिन क्यों है? सगुण मार्ग श्रेष्ठतम है जिनका मन अव्यक्त ( निराकार ) ক 3নুসা, মাকায कृष्ण में आसक्त है॰ उन्हें अधिक क्लेश रूप के प्रेमी भक्त "युक्ततम " होता है क्योकि देह अभिमानी (अत्यधिक श्रेष्ठ) हैं। के लिए यह गति दुःख से प्राप्त होती हैे। भगवान को प्रिय भक्त के लक्षण द्वेष रहित, मैत्री अहंकार और संतोषी और समभाव और क्षमा दृढ़ निश्वयी க সমনা ম ২টিন সী মুত্র-বুঃস, সান ರ87837 # अपमान ओर जो हर परिस्थिति में जो मै और मेरेपन के সী কিমীথী সাণীী ম और भाव से मुक्त हैं और किसी  निरंतर संतुष्ट रहते हें ओर द्वेप नहीं करते, सबके मित्र समान क्षमाशील हें। है और करुणा से भरे हैं। जिनका निश्वय भी चीज़ मे आसक्ति नही दृढ़ है।  रखते। NotcbookLh அ7ர 3அஙq 12: भक्ति का श्रेष्ठ मार्ग कौन सा है?  पूछते हैं कि यह इन्फोग्राफिक अर्जुन की जिज्ञासा से शुरू होता है, जिसमें वे भगवान  தனர் कौन श्रेष्ठ है ~ जो आपके साकार (सगुण) रूप की पूजा करते हैं, या जो आपके अविनाशी, निराकार (निर्गुण) रूप की उपासना करते हैं? इन्फोग्राफि कृष्ण के उत्तर को सारांशित करता है। निर्गुण उपासना सगुण उपासना কী পুচা) की पूजा) (निराकार रूप (साकार रूप जो भक्त मन को मुझमें एकाग्र करके  जो इंद्रियों को वश में करके अविनाशी परम श्रद्धा से मेरी पूजा करते हैं। सर्वव्यापी और अचिन्त्य ब्रह्य की उपासना करते है। निराकार मार्ग भगवान का निर्णयः अधिक कठिन क्यों है? सगुण मार्ग श्रेष्ठतम है जिनका मन अव्यक्त ( निराकार ) ক 3নুসা, মাকায कृष्ण में आसक्त है॰ उन्हें अधिक क्लेश रूप के प्रेमी भक्त "युक्ततम " होता है क्योकि देह अभिमानी (अत्यधिक श्रेष्ठ) हैं। के लिए यह गति दुःख से प्राप्त होती हैे। भगवान को प्रिय भक्त के लक्षण द्वेष रहित, मैत्री अहंकार और संतोषी और समभाव और क्षमा दृढ़ निश्वयी க সমনা ম ২টিন সী মুত্র-বুঃস, সান ರ87837 # अपमान ओर जो हर परिस्थिति में जो मै और मेरेपन के সী কিমীথী সাণীী ম और भाव से मुक्त हैं और किसी  निरंतर संतुष्ट रहते हें ओर द्वेप नहीं करते, सबके मित्र समान क्षमाशील हें। है और करुणा से भरे हैं। जिनका निश्वय भी चीज़ मे आसक्ति नही दृढ़ है।  रखते। NotcbookLh - ShareChat