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#✍गुलजारांचे साहित्य
✍गुलजारांचे साहित्य - Tಾ ೯ಾಾ ೫ ೯ कभी वो भी हमे मनाये , पर ये कम्बखत दिल कभी उनसे रूठा ही नहीं Gulzar Ke.Words @ COOL Tಾ ೯ಾಾ ೫ ೯ कभी वो भी हमे मनाये , पर ये कम्बखत दिल कभी उनसे रूठा ही नहीं Gulzar Ke.Words @ COOL - ShareChat