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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #💌शब्द से शायरी✒️
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं, अपनों के अपनों पर यहां इल्जाम बहुत है. शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं॰ लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है. . इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं, अपनों के अपनों पर यहां इल्जाम बहुत है. शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं॰ लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है. . - ShareChat