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तुम जब साफ हो तो सफाई क्यों दे रही हो... बेगुनाह होकर भी ये दुहाई क्यों दे रही हो... जिनकी नज़रों में तुम पहले ही गलत ठहर चुके हो... उन्हें अपनी मासूमियत की नुमाइश क्यों दे रही हो... यकीन की महक तो रूह से महसूस की जाती है... फिर इन पत्थर के लोगों को गवाही क्यों दे रही हो... आईना धुंधला हो तो अक्स भी बिगड़ जाता है... तुम अंधेरों के शहर में रौशनी क्यों दे रही हो... खामोश रहकर भी तुम बहुत कुछ कह सकती हो... बेवजह लफ्जों को इतनी गहराई क्यों दे रही हो #💖 રોમેન્ટિક સ્ટેટ્સ #💓 લવ સ્ટેટ્સ #👌 બેસ્ટ ફ્રેન્ડ #🤝 દોસ્તી શાયરી #💘 પ્રેમ 💘
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