भारतीय ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, 'अशुभ समय' वह काल होता है जिसमें नई शुरुआत या महत्वपूर्ण कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। यहाँ आपके लिए 5 प्रमुख टॉपिक दिए गए हैं:
1. राहुकाल (Rahu Kaal)
यह प्रतिदिन आने वाला लगभग 90 मिनट का समय होता है। माना जाता है कि इस दौरान राहु का प्रभाव सबसे अधिक होता है, इसलिए कोई भी नया व्यापार, यात्रा या निवेश शुरू करना वर्जित माना जाता है। यह समय हर दिन अलग-अलग होता है।
2. भद्रा काल (Bhadra Kaal)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। भद्रा काल को मांगलिक कार्यों (जैसे विवाह, मुंडन, या गृह प्रवेश) के लिए बहुत अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि "भद्रा में किया गया कार्य कभी सफल नहीं होता।"
3. पंचक (Panchak)
जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो उस समय को पंचक कहा जाता है। यह लगभग 5 दिनों की अवधि होती है। इसमें विशेष रूप से दक्षिण दिशा की यात्रा करना, घर की छत डलवाना या लकड़ी इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है।
4. यमघंट काल (Yamaghant Kaal)
यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबंधित माना जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस समय में कोई नया काम शुरू करता है, तो उसके परिणाम कष्टकारी हो सकते हैं। इसे राहुकाल से भी अधिक घातक माना जाता है।
5. खरमास या होलाष्टक (Kharmas or Holashtak)
* खरमास: जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है, तो एक महीने के लिए शुभ कार्य रुक जाते हैं।
* होलाष्टक: होली से 8 दिन पहले का समय, जिसमें कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता क्योंकि ग्रहों का स्वभाव उग्र होता है।
> विशेष नोट: आधुनिक दृष्टिकोण से ये समय केवल सावधानी बरतने और आत्म-चिंतन के लिए होते हैं। यदि कोई कार्य अत्यंत आवश्यक हो, तो उसे 'अभिजीत मुहूर्त' में किया जा सकता है, जो अक्सर दोपहर के समय आता है और सभी दोषों को शांत करता है।
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क्या आप इनमें से किसी विशेष समय (जैसे राहुकाल) की गणना करने का तरीका जानना चाहेंगे?
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