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#दिल कि बातें ... दिल कि कलम से #♥️♥️अल्फाज ए मुहब्बत ए इश्क मेरे जज्बात ♥️♥️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी #💞Heart touching शायरी✍️
दिल कि बातें ... दिल कि कलम से - से कभी, तुम भी थक जाओ गर फुर्सतों ' में   पुकारो   मुझे। अपनी   तन्हाइयों M मैं हूँ इक आईना टूट कर भी अगर, अपने हर झूठ से तुम नकारो   मुझे। सिखलाया था मुस्कुराना   मुझे, तुम ने फिर दर्द से ही॰ सँवारो मुझे। গজ मैं अगर बोझ हूँ आपके 4574 का, अगले उस मोड पे ही उतारो मुझे। मैं तुम्हारा हूँ शर्त   इतनी   मिरी, पर अपनी हर जीत में वारो मुझे। 314 ये ग़ज़ल मुझ से ज़्यादा लगे, எி इस को छू कर लबों से निखारो मुझे। ٤ 4 எ6, शर्त काफ़ी आपका अपनी   रगों से मुझे। गुजारो 314  #, आपको लगता है राग   जैसा गजल जैसे दिल में उतारो मुझे। எ सिर्फ अहसास या रूह में  हूँ बसा, ೯್೯ ಔ ತಳ या  निहारो   मुझे। # ज़मीं, तुम्हारी तुम्हारा मुक़द्दर , उजाड़ो   मुझे। चाहो बाँधो मुझे, या हूँ मै कश्ती बिना कोई पतवार के, आप हो इक नदी तारो   मुझे। अप मैं तो मिट्टी सदा आप हो आसमाँ , या बना दो  मुझे , या बिगाड़ो   मुझे। से कभी, तुम भी थक जाओ गर फुर्सतों ' में   पुकारो   मुझे। अपनी   तन्हाइयों M मैं हूँ इक आईना टूट कर भी अगर, अपने हर झूठ से तुम नकारो   मुझे। सिखलाया था मुस्कुराना   मुझे, तुम ने फिर दर्द से ही॰ सँवारो मुझे। গজ मैं अगर बोझ हूँ आपके 4574 का, अगले उस मोड पे ही उतारो मुझे। मैं तुम्हारा हूँ शर्त   इतनी   मिरी, पर अपनी हर जीत में वारो मुझे। 314 ये ग़ज़ल मुझ से ज़्यादा लगे, எி इस को छू कर लबों से निखारो मुझे। ٤ 4 எ6, शर्त काफ़ी आपका अपनी   रगों से मुझे। गुजारो 314  #, आपको लगता है राग   जैसा गजल जैसे दिल में उतारो मुझे। எ सिर्फ अहसास या रूह में  हूँ बसा, ೯್೯ ಔ ತಳ या  निहारो   मुझे। # ज़मीं, तुम्हारी तुम्हारा मुक़द्दर , उजाड़ो   मुझे। चाहो बाँधो मुझे, या हूँ मै कश्ती बिना कोई पतवार के, आप हो इक नदी तारो   मुझे। अप मैं तो मिट्टी सदा आप हो आसमाँ , या बना दो  मुझे , या बिगाड़ो   मुझे। - ShareChat