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#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . कबीर साहिब जी अलख अभेवा।। बोलत हैं धर्मदास, सुनौं सरबंगी देवा। देखै पिण्ड अरू प्राण,कहौ तुम अलख अभेवा।। नाद बिंद की देह, शरीर है प्राण‌ तुम्हारै। तुम बोलत बड़ बात, नहीं आवत दिल म्हारै।। खान पान अस्थान, देह में बोलत दीशं। कैसे अलख स्वरूप, भेद कहियो जगदीशं।। ‌ कैसैं रचे चंद अरू सूर, नदी गिरिबर पाषानां। कैसैं पानी पवन, धरनि‌ पृथ्वी असमानां।। कैसैं सष्टि संजोग, बिजोग‌ करैं किस‌ भांती। कौन कला करतार,कौन बिधि अबिगत नांती।। कैसैं घटि घटि रम रहे, किस बिधि रहौ नियार। कैसैं धरती पर चलौ, कैसैं अधर अधार।। धर्मदास जी श्री विष्णु जी के भक्त थे। शिव जी की भी भक्ति करते थे। परमात्मा इन्हीं को मानते थे। फिर लोकवेद के आधार से परमात्मा को निराकार भी कहते थे। इसी आधार पर धर्मदास जी ने परमात्मा से प्रश्न किया कि आपका नाद-बिन्द यानि माता-पिता से उत्पन्न शरीर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। आप खाते-पीते हो, बोलते, चलते हो। आप अपने को परमेश्वर भी कह रहे हो। परमात्मा तो निराकार है। वह दिखाई नहीं देता। हे जगदीश! मुझे यह (भेद) रहस्य समझाईए। आपने सृष्टि की रचना कैसे की? कैसे चाँद व सूर्य उत्पन्न किए? कैसे नदी, पहाड़, पानी, पवन, पृथ्वी, आकाश की रचना की? आप कितनी कला के प्रभु हैं? जैसे श्री विष्णु जी सोलह कला के प्रभु हैं। आप कैसे सर्वव्यापक हैं? कैसे सबसे (न्यारे) भिन्न हो? धरती पर चलते हो। परंतु आकाश में कैसे चलते हो? यह सब ज्ञान मुझे बताएँ। Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - बौलै जिंद कबीर, बाणी धर्मदासा। 31 हम खालिक हम खलक, सकल हमरा प्रकाशा | 7 बौलै जिंद कबीर, बाणी धर्मदासा। 31 हम खालिक हम खलक, सकल हमरा प्रकाशा | 7 - ShareChat