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#🌸शुभ शुक्रवार🙏
🌸शुभ शुक्रवार🙏 - नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गई, पात झर गए कि शाख़-्शाख जल गई, qI _ चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई, गीत अश्क बन गए॰ छंद हो दफन गए, दिए साथ के सभी पहन गए, gai - धुआँ  Hకే और हम झुके - झुके, पर रुके - रुके उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे। कारवाँ गुज़र गया, गु़बार देखते रहे। नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गई, पात झर गए कि शाख़-्शाख जल गई, qI _ चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई, गीत अश्क बन गए॰ छंद हो दफन गए, दिए साथ के सभी पहन गए, gai - धुआँ  Hకే और हम झुके - झुके, पर रुके - रुके उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे। कारवाँ गुज़र गया, गु़बार देखते रहे। - ShareChat