ShareChat
click to see wallet page
search
#jai shri mahakal
jai shri mahakal - हरि शरणं गौरीशंकर भगवान की जय उमा जोग जप दान तप, नाना व्रत मख नेम राम कृपा नहिं करहिं तस, जस निस्केवल प्रेम  भगवान शिव पार्वती के प्रति कहते हैं॰ हे उमा! योग, जप, दान, तपस्या मिलकर और भाँति भाँति के व्रत यज्ञ नियम आदि भी साधक को प्रभु का वैसा अधिकारी नहीं बना सकते, जैसा कि अनन्य प्रेम बना कृपा प्रभु सिर्फ प्रेम से ही पाये जा सकते हैं सकता है अर्थात श्रीरामचरितमानस, लंकाकांड ११७ ख॰ हरि शरणं गौरीशंकर भगवान की जय उमा जोग जप दान तप, नाना व्रत मख नेम राम कृपा नहिं करहिं तस, जस निस्केवल प्रेम  भगवान शिव पार्वती के प्रति कहते हैं॰ हे उमा! योग, जप, दान, तपस्या मिलकर और भाँति भाँति के व्रत यज्ञ नियम आदि भी साधक को प्रभु का वैसा अधिकारी नहीं बना सकते, जैसा कि अनन्य प्रेम बना कृपा प्रभु सिर्फ प्रेम से ही पाये जा सकते हैं सकता है अर्थात श्रीरामचरितमानस, लंकाकांड ११७ ख॰ - ShareChat