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##santrampalji maharaj #kaber Suparm god
#santrampalji maharaj - মন যাসপাল লা जगत के संते जगत होवै [ साधु के संग साधु होत है॰ साधु के संग परम सुख उपजै , जगत के संग ते जन्म खोवै । [  साधु के संग ते परम पद पाईये , जगत के संग ते दुःख भारी।  कहैं कबीर यह संत का शब्द , रे जीव सब पुरूष नारी।[ सुनो भावार्थ- संत की शरण में आने से जीवन में सुख होता है। परमात्मा का वह परम पद प्राप्त होता है जो गीता अध्याय १५ श्लोक 4 में गीता अध्याय १८ श्लोक ६२ में कहा है। जगत के व्यक्तियों के साथ रहने से जगत भाव ही रहता है और अनमोल मानुष जन्म नष्ट हाे जाता है। Satlok Ashram संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के लिए संपर्क करें :- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ Follow US on মন যাসপাল লা जगत के संते जगत होवै [ साधु के संग साधु होत है॰ साधु के संग परम सुख उपजै , जगत के संग ते जन्म खोवै । [  साधु के संग ते परम पद पाईये , जगत के संग ते दुःख भारी।  कहैं कबीर यह संत का शब्द , रे जीव सब पुरूष नारी।[ सुनो भावार्थ- संत की शरण में आने से जीवन में सुख होता है। परमात्मा का वह परम पद प्राप्त होता है जो गीता अध्याय १५ श्लोक 4 में गीता अध्याय १८ श्लोक ६२ में कहा है। जगत के व्यक्तियों के साथ रहने से जगत भाव ही रहता है और अनमोल मानुष जन्म नष्ट हाे जाता है। Satlok Ashram संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के लिए संपर्क करें :- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ Follow US on - ShareChat