ShareChat
click to see wallet page
search
#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
भगवत गीता - यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम्। क्षत्रक्षत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्रि भरतर्षभा अर्जुन! यावन्मात्र जितने भी स्थावर जंगम प्राणी उत्पन्न होत़े हैं उन सबको तू क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोग से ही उत्पत्न जान् [I26l[ ZE हे अर्जुन! जितना भी स्थावर और जंगम सत्त्व , अर्थात् जीवों की॰. विविधता उत्पन्न होती है चह सब क्षेत्र तृथ्वी और क्षेत्रज्ञ आत्मा के संयोग से उत्पत्न होती है। इसका तात्पर्य यहहै कि सभी जीव और उनके विभिन्न रूप चाहेवे स्थावरहों जिैसे पेड ्पौध या जंगम ैसे मनुष्य और पश. ये सभी क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के मिलन से उत्पत्न होत़़े ఓ बीच के संबंध को स्पष्ट करता है। यह श्लोक प्रकृति और आत्मा क्षेत्र अर्थात् शरीर या भौतिक जगत और क्षेत्रज्ञ अर्थात् आत्मा या चेतना , दोनों का संगम ही जीवन और सत्त्व के सभी रूपों का निर्मण करता हैl टिप्पणीः यह श्लोक हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जीवों की उत्पत्ति और उनके विविध रूप एक गहन आध्यात्मिक सत्य के परिणाम है जहां भौतिक तत्व क्षित्र और आध्यात्मिक तत्व क्षित्रज्ञ का मिलन जीवन का आधार है। यह जीवन की प्रकृति को समझने में सहायक है और हमें यह भी बताता है कि सभी जीवों का अस्तित्व और उनके स्वरूप इन दोनों कि संयोजन से हैl यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम्। क्षत्रक्षत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्रि भरतर्षभा अर्जुन! यावन्मात्र जितने भी स्थावर जंगम प्राणी उत्पन्न होत़े हैं उन सबको तू क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोग से ही उत्पत्न जान् [I26l[ ZE हे अर्जुन! जितना भी स्थावर और जंगम सत्त्व , अर्थात् जीवों की॰. विविधता उत्पन्न होती है चह सब क्षेत्र तृथ्वी और क्षेत्रज्ञ आत्मा के संयोग से उत्पत्न होती है। इसका तात्पर्य यहहै कि सभी जीव और उनके विभिन्न रूप चाहेवे स्थावरहों जिैसे पेड ्पौध या जंगम ैसे मनुष्य और पश. ये सभी क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के मिलन से उत्पत्न होत़़े ఓ बीच के संबंध को स्पष्ट करता है। यह श्लोक प्रकृति और आत्मा क्षेत्र अर्थात् शरीर या भौतिक जगत और क्षेत्रज्ञ अर्थात् आत्मा या चेतना , दोनों का संगम ही जीवन और सत्त्व के सभी रूपों का निर्मण करता हैl टिप्पणीः यह श्लोक हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जीवों की उत्पत्ति और उनके विविध रूप एक गहन आध्यात्मिक सत्य के परिणाम है जहां भौतिक तत्व क्षित्र और आध्यात्मिक तत्व क्षित्रज्ञ का मिलन जीवन का आधार है। यह जीवन की प्रकृति को समझने में सहायक है और हमें यह भी बताता है कि सभी जीवों का अस्तित्व और उनके स्वरूप इन दोनों कि संयोजन से हैl - ShareChat