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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - हरि शरणं नाहं वसामि वैकुंठे योगिनां हृदये न च मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद भगवान कहते है कि॰हे नारद मैं न तो बैकुंठ में ही हूँ और न योगियों के हृदय में ही रहता हूँ मैं रहता तो वहीं रहता हूँ॰ जहाँ प्रेमाकुल होकर मेरे भक्त मेरे नाम का कीर्तन किया करते हैं मैं सर्वदा लोगों के अन्तःकरण में विद्यमान रहता हूं अतः हम लोगों को भगवान की चर्चा व संकीर्तन अधिक से अधिक करना चाहिए क्योंकि भगवान् वहीं निवास करते हैं जहाँ उनका संकीर्तन होता है॰ हरि शरणं हरि शरणं नाहं वसामि वैकुंठे योगिनां हृदये न च मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद भगवान कहते है कि॰हे नारद मैं न तो बैकुंठ में ही हूँ और न योगियों के हृदय में ही रहता हूँ मैं रहता तो वहीं रहता हूँ॰ जहाँ प्रेमाकुल होकर मेरे भक्त मेरे नाम का कीर्तन किया करते हैं मैं सर्वदा लोगों के अन्तःकरण में विद्यमान रहता हूं अतः हम लोगों को भगवान की चर्चा व संकीर्तन अधिक से अधिक करना चाहिए क्योंकि भगवान् वहीं निवास करते हैं जहाँ उनका संकीर्तन होता है॰ हरि शरणं - ShareChat