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#प्रकृति का उपहार
प्रकृति का उपहार - सुप्रभात कभी जीने की आशा , कभी मन की निराशा.. कभी खुशियों की धूप , कभी हकीकत की छांव.. कुछ खोकर पाने की आशा , शायद यही है जीवन की परिभाषा... हैं फूल  ख्वाहिशों से नहीं गिरते  झोली में , कर्म की शाख को हिलाना होगा.. कुछ नहीं होगा कोसने से अंधेरे को, अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा Good morning सुप्रभात कभी जीने की आशा , कभी मन की निराशा.. कभी खुशियों की धूप , कभी हकीकत की छांव.. कुछ खोकर पाने की आशा , शायद यही है जीवन की परिभाषा... हैं फूल  ख्वाहिशों से नहीं गिरते  झोली में , कर्म की शाख को हिलाना होगा.. कुछ नहीं होगा कोसने से अंधेरे को, अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा Good morning - ShareChat