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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
✍️ साहित्य एवं शायरी - सर पे उम्मीदों की गठरी लाद कर बेहाल हूँ। मैं समय हूँ, लोग कहते हैं कि नया साल हूँ।। सर पे उम्मीदों की गठरी लाद कर बेहाल हूँ। मैं समय हूँ, लोग कहते हैं कि नया साल हूँ।। - ShareChat