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✍️ साहित्य एवं शायरी - पत्थरों के शहर में कच्चे मकान कौन रखता 8. লিব आजकल हवा के रोशनदान कौन रखता है. अपने घर की कलह से फुरसत मिले..तो सुने. . आजकल पराई दीवार पर कान कौन रखता 8. जहां, जब, जिसका, जी चाहा थूक दिया.. में पीकदान कौन रखता है. हाथों आजकल खुद ही पंख लगाकर उड़ा देते हैं चि़ड़ियों . आजकल परिंदों मे जान कौन रखता है.. हर चीज मुहैया है मेरे शहर में किश्तों पर. आजकल हसरतों पर लगाम कौन रखता है. बहलाकर छोड़ आते है वृद्धाश्रम में मां बाप को. आजकल घर में पुराना सामान कौन रखता है 1:36 PM पत्थरों के शहर में कच्चे मकान कौन रखता 8. লিব आजकल हवा के रोशनदान कौन रखता है. अपने घर की कलह से फुरसत मिले..तो सुने. . आजकल पराई दीवार पर कान कौन रखता 8. जहां, जब, जिसका, जी चाहा थूक दिया.. में पीकदान कौन रखता है. हाथों आजकल खुद ही पंख लगाकर उड़ा देते हैं चि़ड़ियों . आजकल परिंदों मे जान कौन रखता है.. हर चीज मुहैया है मेरे शहर में किश्तों पर. आजकल हसरतों पर लगाम कौन रखता है. बहलाकर छोड़ आते है वृद्धाश्रम में मां बाप को. आजकल घर में पुराना सामान कौन रखता है 1:36 PM - ShareChat