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#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - अर्जन उवाच स्थाने हृषीकेश तव प्रकी्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च। रक्षासि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च् বিভুভভঘা:ll अर्जुन बोले- हे अन्तर्यामिन्! यह योग्य ही है कि आपके नाम ूण और प्रभाव केको्तन सेजगत अति हषित हयो रहा है और अनुराग कोभी प्राप्त हो रहा हैतथा भयभीत राक्षस लोग दिशाओंमें भाग रहेहैं और सब सिद्रगणों के समृदाय नमस्कार कर रहेहै ||36/| aI इस श्लोक में अर्जन भगवान श्रीकष्ण के विराट रूप की दिव्यता और प्रभावॅ का वर्णन कर रहेहै। अर्जन नेदेखा कि भगवान का विराट रूप इतना अद्द्रुृत और भव्य है कि पूरा जगत इससे प्रभावित हो रहा है। सभी जीव जंतु औरं दिशाएँ इस रूप कोदेखकर भयभीत हो रहेहै जिबकि सिद्धोंकी मंडलियाँ इस विराट रूप कीपूजा और नमस्कार कर रही है। यह श्लोक इस बात की पुॅष्टि करता है कि भगवान का विराट रूप सार्वभौम और अद्वितीय हैजो सभीकी आँखों में आकाशीय भय और श्रद्धा पैदा करता నే1 अर्जन उवाच स्थाने हृषीकेश तव प्रकी्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च। रक्षासि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च् বিভুভভঘা:ll अर्जुन बोले- हे अन्तर्यामिन्! यह योग्य ही है कि आपके नाम ूण और प्रभाव केको्तन सेजगत अति हषित हयो रहा है और अनुराग कोभी प्राप्त हो रहा हैतथा भयभीत राक्षस लोग दिशाओंमें भाग रहेहैं और सब सिद्रगणों के समृदाय नमस्कार कर रहेहै ||36/| aI इस श्लोक में अर्जन भगवान श्रीकष्ण के विराट रूप की दिव्यता और प्रभावॅ का वर्णन कर रहेहै। अर्जन नेदेखा कि भगवान का विराट रूप इतना अद्द्रुृत और भव्य है कि पूरा जगत इससे प्रभावित हो रहा है। सभी जीव जंतु औरं दिशाएँ इस रूप कोदेखकर भयभीत हो रहेहै जिबकि सिद्धोंकी मंडलियाँ इस विराट रूप कीपूजा और नमस्कार कर रही है। यह श्लोक इस बात की पुॅष्टि करता है कि भगवान का विराट रूप सार्वभौम और अद्वितीय हैजो सभीकी आँखों में आकाशीय भय और श्रद्धा पैदा करता నే1 - ShareChat