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#🖋ग़ज़ल
🖋ग़ज़ल - तेरी महफ़िल में हज़ारों हों चराग़ जलाने वाले, मिरी हसरत है कि तू मेरे अंधेरे को तरसे। । तेरी महफ़िल में हज़ारों हों चराग़ जलाने वाले, मिरी हसरत है कि तू मेरे अंधेरे को तरसे। । - ShareChat