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नीला आसमान 🌌 - ShareChat
१५ ह व्ह्यू · १.३ ह प्रतिक्रिया | आज संसद में अपने वक्तव्य के दौरान सरकार का ध्यान भारतीय शिक्षा व्यवस्था के वास्तविक और चिंताजनक प्रभावों की ओर आकृष्ट किया और कई गंभीर सवाल खड़े किए। यह एक कटु सत्य है कि आज भी देश के विभिन्न राज्यों, चाहे वह उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, राजस्थान या आंध्रप्रदेश हों हर जगह अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के साथ जातीय भेदभाव खुले तौर पर देखने को मिलता है। कहीं छात्रों के प्रैक्टिकल में जानबूझकर नंबर काटे जाते हैं, तो कहीं उन्हें अन्य छात्रों से अलग बैठाया जाता है। हाल ही में बिहार में मुसहर समाज के छात्रों को स्कूल प्रशासन द्वारा अलग बैठाने की घटना ने यह साबित कर दिया कि सामाजिक समानता आज भी कागज़ों तक सीमित है। जहाँ सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह नए स्कूल और कॉलेज खोलकर शिक्षा को सुलभ बनाए, वहीं सरकार ने अब तक 93 हजार से अधिक स्कूल-कॉलेज बंद करने का काम किया है, जो भविष्य के साथ सीधा अन्याय है। सरकार को मध्यम वर्ग की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की लगातार बढ़ती फीस के कारण आज योग्य और प्रतिभाशाली छात्र डॉक्टर और इंजीनियर बनने से वंचित हो रहे हैं। इसके साथ ही प्रमोशन में आरक्षण का मामला वर्षों से लंबित है, जिसे अविलंब लागू किया जाना चाहिए। संविधान लागू हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन आज भी मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल पाया है, जो संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। इतना ही नहीं, मध्यप्रदेश में लगातार लोगों के गायब होने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। अब तक 60 हजार से अधिक लोग लापता हो चुके हैं, जिनमें 48 हजार लड़कियाँ शामिल हैं। वहीं दिल्ली में पिछले 27 दिनों में 807 लोग गायब हुए, जिनमें 591 महिलाएँ हैं। मैं सरकार से स्पष्ट रूप से पूछना चाहता हूँ कि इन घटनाओं के पीछे कौन-सा संगठित गिरोह या अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क कार्य कर रहा है? इसकी निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों को सामने लाया जाए और देश की बेटियों व नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। | Er Ram Ji Gautam
आज संसद में अपने वक्तव्य के दौरान सरकार का ध्यान भारतीय शिक्षा व्यवस्था के वास्तविक और चिंताजनक प्रभावों की ओर आकृष्ट किया और कई गंभीर सवाल खड़े किए। यह...