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मैं प्रेम को ढूंढ़ते हुये
अपराधों के अंधेरों तक गया
प्रेम काले बिल्ले की तरह मुझ पर झपटा
उसके नाखूनों के निशान से
मेरा चेहरा बदल चुका है
इधर रोज़ी रोटी की दैनिक लड़ाईयों ने
लगातार घाव पर घाव मारा
इतने मोर्चे एक साथ खुले
फ़िर भी पराजय मेरा शब्द नहीं हो सकता
बस हादसों की यह असमाप्त सूची है
जिसे घायल आँखों से निहारता हूँ
और अनिच्छा से कहता हूँ :
" प्रेम अब मेरी प्राथमिकता में नहीं है "
💧 सुप्रभात 💧 #🌞 Good Morning🌞

