ब्रज के दर्शन 🙏
जमुनावता गाँव ( गोवर्धन )
ये ब्रज का वो स्थान है जो ब्रज के अष्टछाप कवि में से एक की जन्मस्थली है।
कुंभनदास (1468 ई. – 1583 ई.)
कुंभनदास जी का जन्म गोवर्धन के निकट जमुनावता ग्राम में संवत् 1525 विक्रमी कार्तिक कृष्ण एकादशी को हुआ। ये अष्टसखाओं में आयु की दृष्टि से सहसे बड़े थे। इनके सात पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटे चतुर्भुजदास थे। चतुर्भुजदास बाद में विठ्ठलनाथ से दीक्षा लेकर पुष्टिमार्ग में प्रवृत्त हुए। कहते हैं एक बार सम्राट अकबर ने इनकी विद्वता से प्रभावित होकर इन्हें फतेहपुर सीकरी बुलाया। न चाहते हुए भी इन्हें जाना पड़ा। और बादशाह के सम्मुख सिर झुकाना पड़ा। जिसका बाद में इन्हें बड़ा दुख हुआ। क्योंकि ये गिरिधर गोपाल की ही भक्ति करते थे। किसी अन्य के सम्मुख इन्हें सिर झुकाना पसंद नहीं था –
संतन को कहाँ सीकरी सों काम ।
आवत जात पनहियाँ टूटी, बिसरि गयो हरिनाम।।
जिनको मुख देखे दुख उपजत, तिनको करिबे परि सलाम।
कुंभनदास लाल गिरधर बिनु और सबै बेकाम।।
इनके द्वारा कोई ग्रन्थ नहीं रचा गया केवल कुछ पद ही वार्ता ग्रंथो में मिलते हैं।
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