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#अनन्त जीवन के वचन #WORD OF GOD ✝️ #spritul word #✝️📖word of god📖✝️ #परमेश्वर का पवित्र वचन
अनन्त जीवन के वचन - ODaily Breade प्रियों पापी मनुष्य के उद्धार के लिए धीरज धरना उचित है ताकि उसका नाश न हो और उसके जीवन में उजियाला हो, जो जगत का उजियाला प्रभु येशू मसीह है। परन्तु यदि हम पाप को बाहर निकालने के प्रति धीमे हो गए, तो मनुष्य पाप के फन्दे में फसकर उलझता चला जाता है और आत्मिक मृत्यु की और प्रस्थान करता है। हम देखते हैं कि खुद ' प्रभु येशू मसीह ने अपने विरोध में पापियों का वाद विवाद लहू बहने तक सह लिया और क्रूस की मृत्यु भी सह ली॰ परन्तु पाप को अर्थात आज्ञाभंग का अपने जीवन में प्रवेश ही नहीं होने दिया। इसलिए कि हम पापियों का नाश न हो। उसने हमारे लिए सबकुछ सहा , परन्तु हम देखते हैं कि पाप को निकाल बाहर करने के प्रति वह आवेशी था। उसने मंदिर में से बेचनेवालों को तुरन्त बाहर निकाल दिया था। वह बीमारियों को तुरन्त विकारमुक्त करता था। क्योंकि पाप के कारण ही प्रारंभ हुआ है। परन्तु अब हमारे लिए प्रभु येशू मसीह मृत्यु के राज्य का ने उसपर ' की प्रभुता ' जय पाई है। इसलिए अब पाप ` हमपर नहीं है, हम अनुग्रह के अधीन हो गए हैं। परन्तु वचन कहता है कि हम शरीर के अनुसार दिन काटेंगे तो मरेंगे , परन्तु यदि हम पवित्र आत्मा से शरीर की क्रियाओं को मारेंगे , तो जीवित रहेंगे ( रोमियों ८:१३)| अर्थात हमें की सहायता से आत्मिक युद्ध करना है ताकि पाप का पवित्र आत्मा जीवन में प्रवेश न हो परन्तु यदि हम दुर्बल भी हो गए तो हम प्रभु हमारे ' के अनुग्रह से उस दुर्बलता में सबल हो जाते है। परन्तु हमें पाप को बाहर निकालने के लिए धीमे नहीं होना है अन्यथा हम मसीह की आज्ञाओं को तोड़ते हुए उस पाप में बढ़ते जा सकते हैं। ODaily Breade प्रियों पापी मनुष्य के उद्धार के लिए धीरज धरना उचित है ताकि उसका नाश न हो और उसके जीवन में उजियाला हो, जो जगत का उजियाला प्रभु येशू मसीह है। परन्तु यदि हम पाप को बाहर निकालने के प्रति धीमे हो गए, तो मनुष्य पाप के फन्दे में फसकर उलझता चला जाता है और आत्मिक मृत्यु की और प्रस्थान करता है। हम देखते हैं कि खुद ' प्रभु येशू मसीह ने अपने विरोध में पापियों का वाद विवाद लहू बहने तक सह लिया और क्रूस की मृत्यु भी सह ली॰ परन्तु पाप को अर्थात आज्ञाभंग का अपने जीवन में प्रवेश ही नहीं होने दिया। इसलिए कि हम पापियों का नाश न हो। उसने हमारे लिए सबकुछ सहा , परन्तु हम देखते हैं कि पाप को निकाल बाहर करने के प्रति वह आवेशी था। उसने मंदिर में से बेचनेवालों को तुरन्त बाहर निकाल दिया था। वह बीमारियों को तुरन्त विकारमुक्त करता था। क्योंकि पाप के कारण ही प्रारंभ हुआ है। परन्तु अब हमारे लिए प्रभु येशू मसीह मृत्यु के राज्य का ने उसपर ' की प्रभुता ' जय पाई है। इसलिए अब पाप ` हमपर नहीं है, हम अनुग्रह के अधीन हो गए हैं। परन्तु वचन कहता है कि हम शरीर के अनुसार दिन काटेंगे तो मरेंगे , परन्तु यदि हम पवित्र आत्मा से शरीर की क्रियाओं को मारेंगे , तो जीवित रहेंगे ( रोमियों ८:१३)| अर्थात हमें की सहायता से आत्मिक युद्ध करना है ताकि पाप का पवित्र आत्मा जीवन में प्रवेश न हो परन्तु यदि हम दुर्बल भी हो गए तो हम प्रभु हमारे ' के अनुग्रह से उस दुर्बलता में सबल हो जाते है। परन्तु हमें पाप को बाहर निकालने के लिए धीमे नहीं होना है अन्यथा हम मसीह की आज्ञाओं को तोड़ते हुए उस पाप में बढ़ते जा सकते हैं। - ShareChat