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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - तलाश करूं अपने जैसा कहां गुनाहगार कोई, इस जहां में तो सबके सब फ़रिश्ते ही रहते हैं, तलाश करूं अपने जैसा कहां गुनाहगार कोई, इस जहां में तो सबके सब फ़रिश्ते ही रहते हैं, - ShareChat