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#सुविचार #🌸जय श्री श्याम
सुविचार - सुविचार कर्म तीन प्रकारके हैं- संचित,  क्रियमाण होते और प्रारब्ध | जैसे अन्नका पुराना संग्रह पड़ा है- संचित है। नया अन्न पैदा करना ' क्रियमाण है | 46 खानेके लिये निकाल लिया-्यह ' प्रारब्ध' है | परिस्थिति प्रारब्ध कर्मसे आती है । उस परिस्थितिका सदुपयोग दुरुपयोग करनाः नया कर्म है | रुपये प्रारब्धसे अथव मिलते हैं॰ पर उनको अच्छे य़ा बुरे काममें लगाना नया कर्म है। निषिद्ध वस्तुंओंका च्यापार ಊ  l नया पापकर्म है॰ जिसका दण्ड भोगना पडेगा; क्योंकि उससे लोगोंका नुकसान होता है॰ वे व्यसनी बनते हैं |जो पुस्तकों आदिके द्वारा अच्छे भावोंका प्रचार करते हैं॰ उनको बड़ा भारी पुण्य होता है। जय श्री श्याम सुविचार कर्म तीन प्रकारके हैं- संचित,  क्रियमाण होते और प्रारब्ध | जैसे अन्नका पुराना संग्रह पड़ा है- संचित है। नया अन्न पैदा करना ' क्रियमाण है | 46 खानेके लिये निकाल लिया-्यह ' प्रारब्ध' है | परिस्थिति प्रारब्ध कर्मसे आती है । उस परिस्थितिका सदुपयोग दुरुपयोग करनाः नया कर्म है | रुपये प्रारब्धसे अथव मिलते हैं॰ पर उनको अच्छे य़ा बुरे काममें लगाना नया कर्म है। निषिद्ध वस्तुंओंका च्यापार ಊ  l नया पापकर्म है॰ जिसका दण्ड भोगना पडेगा; क्योंकि उससे लोगोंका नुकसान होता है॰ वे व्यसनी बनते हैं |जो पुस्तकों आदिके द्वारा अच्छे भावोंका प्रचार करते हैं॰ उनको बड़ा भारी पुण्य होता है। जय श्री श्याम - ShareChat