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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🤲अल्लाह हु अक़बर #🕌मस्जिद 🤲
❤️अस्सलामु अलैकुम - ieu ढयाद आते हैँ मोहम्मद (0 (  UU मैं जब क़ुरान पढ़ता हूँ मुहम्मद याद आते हैं हदीस-ए-पाक सुनता हूँ मुहम्मद याद आते हैं मोअज़्ज़िन की अज़ान में जब मुहम्मद नाम आता है दुरूद-ए-्पाक पढ़ता हूँ मुहम्मद याद आते हैं... वो ताइफ़ में नबी जी पर किया जो ज़ुल्म लोगों ने मैं जब भी चोट खाता हूँ मुहम्मद याद आते हैं.....! जिहाद फ़ी सबील अल्लाह में ज़ख्मी होना आक़ा का मैं ख़ून के आँसू रोता हूँ मुहम्मद याद आते हैं...... नबी के घर में खाने को महीनों तक मिले न कुछ जब भी भूखा होता हूँ मुहम्मद याद आते हैं ......! मेरे आक़ा की फ़ुरक़त में ये दिल बिल्कुल नहीं लगता   54 हूँ मुहम्मद याद आते हैं ऑसू  बहाता तसव्वुर और तख़य्युल में नबी जी के करीम आज़म मैं हाल-ए-दिल सुनाता हूँ नबी जी याद आते हैं. .......! मैं जब क़ुरआन पढ़ता हूँ मुहम्मद याद आते हैं हदीस ए-्पाक सनता हँ महम्मद याद आते हैं! ieu ढयाद आते हैँ मोहम्मद (0 (  UU मैं जब क़ुरान पढ़ता हूँ मुहम्मद याद आते हैं हदीस-ए-पाक सुनता हूँ मुहम्मद याद आते हैं मोअज़्ज़िन की अज़ान में जब मुहम्मद नाम आता है दुरूद-ए-्पाक पढ़ता हूँ मुहम्मद याद आते हैं... वो ताइफ़ में नबी जी पर किया जो ज़ुल्म लोगों ने मैं जब भी चोट खाता हूँ मुहम्मद याद आते हैं.....! जिहाद फ़ी सबील अल्लाह में ज़ख्मी होना आक़ा का मैं ख़ून के आँसू रोता हूँ मुहम्मद याद आते हैं...... नबी के घर में खाने को महीनों तक मिले न कुछ जब भी भूखा होता हूँ मुहम्मद याद आते हैं ......! मेरे आक़ा की फ़ुरक़त में ये दिल बिल्कुल नहीं लगता   54 हूँ मुहम्मद याद आते हैं ऑसू  बहाता तसव्वुर और तख़य्युल में नबी जी के करीम आज़म मैं हाल-ए-दिल सुनाता हूँ नबी जी याद आते हैं. .......! मैं जब क़ुरआन पढ़ता हूँ मुहम्मद याद आते हैं हदीस ए-्पाक सनता हँ महम्मद याद आते हैं! - ShareChat