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#🖋कहानी: टूटे दिल की💔
🖋कहानी: टूटे दिल की💔 - "दिखावे की शरीफ़ बनने की आदत नहीं हमें शब्द थोड़े कड़वे जरूर हैं पर हम खुले दिल के हैं।" "सिर्फ जिस्म ही नहीं रूह भी कांप जाती है, जब कोई अपना बनकर पीठ पीछे खंजर चलाता है।" "दिखावे की शरीफ़ बनने की आदत नहीं हमें शब्द थोड़े कड़वे जरूर हैं पर हम खुले दिल के हैं।" "सिर्फ जिस्म ही नहीं रूह भी कांप जाती है, जब कोई अपना बनकर पीठ पीछे खंजर चलाता है।" - ShareChat