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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ले चल उसी बचपन में जहां ना कोई।। जरूरी था.. ना कोई जरूरत थी, ले चल उसी बचपन में जहां ना कोई।। जरूरी था.. ना कोई जरूरत थी, - ShareChat