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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गोद लेना (अडॉप्शन) भी व्यक्ति के प्रजनन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का हिस्सा है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि परिवार बनाने का अधिकार केवल जैविक तरीके तक सीमित नहीं है, बल्कि गोद लेना भी उसी अधिकार का समान और वैध रूप है। अदालत ने कहा, “प्रजनन स्वतंत्रता केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी परिवार बनाने और माता-पिता बनने के अधिकार का समान रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है।” कोर्ट ने कहा, “गोद लिया गया बच्चा और जैविक बच्चा समान हैं। मातृत्व की भावना और जिम्मेदारी दोनों में कोई अंतर नहीं है।” अदालत ने यह भी दोहराया कि व्यक्ति को परिवार बनाने, बच्चों को अपनाने और उनका पालन-पोषण करने का अधिकार उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का हिस्सा है। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि गोद लेना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि संवैधानिक रूप से संरक्षित एक महत्वपूर्ण अधिकार है। #satyarthrtiwari #SupremeCourtIndia
satyarthrtiwari - गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा कोर्ट ने कहा सुप्रीम ' मातृत्व केवल जैविक नहीं गोद लेना भी मातृत्व का वैध और सम्मानित अधिकार है मातृत्व केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, पालन ्पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है यह निर्णय " महिलाओ की स्वतंत्रता और गरिमा को मजबूत करता है ಟugದu[] (ೊಐತ) CONSTITUTION INDIAN गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा कोर्ट ने कहा सुप्रीम ' मातृत्व केवल जैविक नहीं गोद लेना भी मातृत्व का वैध और सम्मानित अधिकार है मातृत्व केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, पालन ्पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है यह निर्णय " महिलाओ की स्वतंत्रता और गरिमा को मजबूत करता है ಟugದu[] (ೊಐತ) CONSTITUTION INDIAN - ShareChat