ShareChat
click to see wallet page
search
#✒ शायरी #🤝रिश्ते
✒ शायरी - ಕಗಹಗಿಗ नाम से नहीं , निभाने से मज़बूत होते हैं। कभी सबसे गहरा सहारा बनते हैं, तो कभी वही सबसे गहरा ज़ख़्म भी दे जाते हैं। क्योंकि रिश्तों में खून नहीं , समझ , इज़्ज़त और अपनापन उन्हें ज़िंदा रखता है। जो समय पर साथ खडा रहे, वही अपना कहलाता है, वरना रिश्ता सिर्फ़ पहचान बनकर रह जाता है। ಕಗಹಗಿಗ नाम से नहीं , निभाने से मज़बूत होते हैं। कभी सबसे गहरा सहारा बनते हैं, तो कभी वही सबसे गहरा ज़ख़्म भी दे जाते हैं। क्योंकि रिश्तों में खून नहीं , समझ , इज़्ज़त और अपनापन उन्हें ज़िंदा रखता है। जो समय पर साथ खडा रहे, वही अपना कहलाता है, वरना रिश्ता सिर्फ़ पहचान बनकर रह जाता है। - ShareChat