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#☝वन लाइन कोट्स🤘 #❤️लव यू जिंदगी
☝वन लाइन कोट्स🤘 - प्रेम तो प्रकृति का स्वरूप है। सम्बन्धों से क्या अभिप्राय !? इसका जो सगे सम्बन्धी हैं उनसे प्रेम हाे ! अथवा जिनसे प्रेम है उनसे सम्बन्ध भी हो | ये आवश्यक तो नहीं !? प्रेम विश्वास की छांव में पनपता है। और हर कोई विश्वासनीयता के पात्र हो ! ये सम्भव नहीं ।l Guddu Vaishnav प्रेम तो प्रकृति का स्वरूप है। सम्बन्धों से क्या अभिप्राय !? इसका जो सगे सम्बन्धी हैं उनसे प्रेम हाे ! अथवा जिनसे प्रेम है उनसे सम्बन्ध भी हो | ये आवश्यक तो नहीं !? प्रेम विश्वास की छांव में पनपता है। और हर कोई विश्वासनीयता के पात्र हो ! ये सम्भव नहीं ।l Guddu Vaishnav - ShareChat