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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - ।वेवकानंद का कहा ।के तू पागल है! तू जा कर मादेर में काली को क्यों नहीं कहता? यहां-वहां क्या भटक रहा है? एक दफा जा कर दे, सब मामला हल हो जाएगा। तू जा प्रार्थना कर। अब रामकृष्ण कहे तो विवेकानंद इनकार कैसे करें? गए। घंटा-भर लग गया। बाहर रामकृष्ण बैठे हैं चबूतरे पर, राह देख रहे हैं। जब निकले विवेकानंद गदगद आंखों से आंसुओं की धार बह रही है, मस्ती की तरंग छाई हुई। तीन दिन के भूखे हैं, यह तो भूल ही गए हैं। बड़े आनंद मग्न हैं। आकर रामकृष्ण के चरणों में गिर बात पीछे होगी , तूने कह पड़े। रामकृष्ण ने कहाः दूसरी दिया न? तूने प्रार्थना कर ली न? विवेकानंद ने कहाः अरे! मैं तो भूल ही गया। मैं प्रार्थना में ऐसा Tಾ೯ ೯ TಾT! रामकृष्ण ने कहाः फिर से जा। ऐसा तीन बार हुआ और तीसरी बार विवेकानंद बाहर आए और रामकृष्ण को देखा और कहा कि माफ करें, यह शायद हो नहीं सकेगा| जैसे ही मैं वहां जाता हूं॰ प्रार्थना ऐसा घेर लेती है कि छोटी छोटी बातें करने का सवाल ही नहीं उठता। और छोटी छोटी बातें करूं, यह बात बेहूदी लगती है, अभद्र लगती है। यह मुझसे नहीं हो सकेगा रामकृष्ण| परमहंसदेव , क्षमा कर दें! यह नहीं मुझसे हो सकेगा | रामकृष्ण ने छाती से लगा लिया विवेकानंद को और कहाः इसीलिए तीन बार भेजा , मैं देखना चाहता था, प्रार्थना में तू कुछ मांग सकता है अब भी या नहीं ? I नहीं मांग सकता तो तू प्रार्थना की कला सीख R ।वेवकानंद का कहा ।के तू पागल है! तू जा कर मादेर में काली को क्यों नहीं कहता? यहां-वहां क्या भटक रहा है? एक दफा जा कर दे, सब मामला हल हो जाएगा। तू जा प्रार्थना कर। अब रामकृष्ण कहे तो विवेकानंद इनकार कैसे करें? गए। घंटा-भर लग गया। बाहर रामकृष्ण बैठे हैं चबूतरे पर, राह देख रहे हैं। जब निकले विवेकानंद गदगद आंखों से आंसुओं की धार बह रही है, मस्ती की तरंग छाई हुई। तीन दिन के भूखे हैं, यह तो भूल ही गए हैं। बड़े आनंद मग्न हैं। आकर रामकृष्ण के चरणों में गिर बात पीछे होगी , तूने कह पड़े। रामकृष्ण ने कहाः दूसरी दिया न? तूने प्रार्थना कर ली न? विवेकानंद ने कहाः अरे! मैं तो भूल ही गया। मैं प्रार्थना में ऐसा Tಾ೯ ೯ TಾT! रामकृष्ण ने कहाः फिर से जा। ऐसा तीन बार हुआ और तीसरी बार विवेकानंद बाहर आए और रामकृष्ण को देखा और कहा कि माफ करें, यह शायद हो नहीं सकेगा| जैसे ही मैं वहां जाता हूं॰ प्रार्थना ऐसा घेर लेती है कि छोटी छोटी बातें करने का सवाल ही नहीं उठता। और छोटी छोटी बातें करूं, यह बात बेहूदी लगती है, अभद्र लगती है। यह मुझसे नहीं हो सकेगा रामकृष्ण| परमहंसदेव , क्षमा कर दें! यह नहीं मुझसे हो सकेगा | रामकृष्ण ने छाती से लगा लिया विवेकानंद को और कहाः इसीलिए तीन बार भेजा , मैं देखना चाहता था, प्रार्थना में तू कुछ मांग सकता है अब भी या नहीं ? I नहीं मांग सकता तो तू प्रार्थना की कला सीख R - ShareChat