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Aarti - आरती श्री शंकर जी की ओंकारा   स्वामी 3 जय शिव ओंकारा जय   शिव ओ॰ || ब्रह्मा विष्णु সল্াশী सदाशिव ओ॰ धारा पं चानन राजे 311 ೦ एकानन चतु रानन ஈன ओ॰ हसासन वृषवाहन गरुड़ासन 4  3 सोहे चतुरभुज 31o चार दशभुज त्रिभुवन | तीनों निरखता ٦٩ ٩٤ ١١ ओ॰ रूप धारी रुडमाला 3T0 अक्षमाला बनमाला भोले   शुभकारी चंदन #8 ओ॰ मृगमद I पीताम्बर श्वेताम्बर 317 311೦ बाघाम्बर प्रेतादिक # মনন্ধানিব্ধ ब्रह्मादिक ओ॰ Il कमंडलु Rga কং   ৯ धर्ता ओ॰ मध्य चक्र कर्ता   संहर्ता कर्ता ओ॰ जग जग पालन 1 अविवेका विष्णु, ओ॰ सदाशिव जानत ब्रह्मा, तीनों   ही प्रणवाक्षर   के मध्ये, ओ॰ एका || স্িযতুত स्वामी जी की आरती जो कोई जन गावे ।। ओ॰ Ik कहत शिवानन्द स्वामी मन वाँछित फल पावे II ओ॰ II http://bhakti SunilManwani com आरती श्री शंकर जी की ओंकारा   स्वामी 3 जय शिव ओंकारा जय   शिव ओ॰ || ब्रह्मा विष्णु সল্াশী सदाशिव ओ॰ धारा पं चानन राजे 311 ೦ एकानन चतु रानन ஈன ओ॰ हसासन वृषवाहन गरुड़ासन 4  3 सोहे चतुरभुज 31o चार दशभुज त्रिभुवन | तीनों निरखता ٦٩ ٩٤ ١١ ओ॰ रूप धारी रुडमाला 3T0 अक्षमाला बनमाला भोले   शुभकारी चंदन #8 ओ॰ मृगमद I पीताम्बर श्वेताम्बर 317 311೦ बाघाम्बर प्रेतादिक # মনন্ধানিব্ধ ब्रह्मादिक ओ॰ Il कमंडलु Rga কং   ৯ धर्ता ओ॰ मध्य चक्र कर्ता   संहर्ता कर्ता ओ॰ जग जग पालन 1 अविवेका विष्णु, ओ॰ सदाशिव जानत ब्रह्मा, तीनों   ही प्रणवाक्षर   के मध्ये, ओ॰ एका || স্িযতুত स्वामी जी की आरती जो कोई जन गावे ।। ओ॰ Ik कहत शिवानन्द स्वामी मन वाँछित फल पावे II ओ॰ II http://bhakti SunilManwani com - ShareChat