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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी मिर्ज़ा ग़ालिब Shaune Tus मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी मिर्ज़ा ग़ालिब Shaune Tus - ShareChat