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#📓 हिंदी साहित्य #📜मेरी कलम से✒️ #📒 मेरी डायरी #🕊️ ऊंची उड़ान 🏃 #💔 हमारी भावनाऐं ❤️
📓 हिंदी साहित्य - पत्तों ने रंग और वो गिर गए, बदला वरना पेड़ को संभालने में कोई दिक्कत नहीं थी। हवा भी वही थी, मौसम भी वही, बस इरादों में पहले जैसी शिद्दत नहीं थी। जड़ें आज भी चुपचाप थामे खडी हैं, पर शाखों में अब वो हिम्मत नहीं थी। गिरना उनका क़सूर भी नहीं था शायद, रुकने की उनमें अब आदत नहीं थी। पत्तों ने रंग और वो गिर गए, बदला वरना पेड़ को संभालने में कोई दिक्कत नहीं थी। हवा भी वही थी, मौसम भी वही, बस इरादों में पहले जैसी शिद्दत नहीं थी। जड़ें आज भी चुपचाप थामे खडी हैं, पर शाखों में अब वो हिम्मत नहीं थी। गिरना उनका क़सूर भी नहीं था शायद, रुकने की उनमें अब आदत नहीं थी। - ShareChat