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#भगवत गीता #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #भगवत गीता श्लोक
भगवत गीता - तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्| चिच्ता लशनचतल म्रमी भवामिनचिरत्पार्थ चित्त ঔড়নি! ওন লান मझमें भक्तों का मै शीघ्र ही मृत्यु रूप संसार ्समुद्र उद्धार करने वॉला होता हूँ |||7||| व्याख्याः @నa जोपूरी तरह से मेरे में ऐसे भक्तों के समाहित होते है प्रति पर्ण निष्ठा खते हैं मैं स्वयं उन्हें मृत्यु के संसार के समुद्र से उबारनेवाला हँ उन भक्तों का मन पूरी तरह सेमझमें स्थिर रहता है॰ और मैं उन्हे शीघ्र ही इसॅ भौतिक संसार के कष्टों से मुक्त कर देता हँl अर्जून,जो लोग पूर्ण भक्ति और समर्पण के साथॅ मुझसे जुड़त है उनके लिए मै जीवन और मृत्यु के चॅक्र से मुक्ति प्रदान करता हूँl तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्| चिच्ता लशनचतल म्रमी भवामिनचिरत्पार्थ चित्त ঔড়নি! ওন লান मझमें भक्तों का मै शीघ्र ही मृत्यु रूप संसार ्समुद्र उद्धार करने वॉला होता हूँ |||7||| व्याख्याः @నa जोपूरी तरह से मेरे में ऐसे भक्तों के समाहित होते है प्रति पर्ण निष्ठा खते हैं मैं स्वयं उन्हें मृत्यु के संसार के समुद्र से उबारनेवाला हँ उन भक्तों का मन पूरी तरह सेमझमें स्थिर रहता है॰ और मैं उन्हे शीघ्र ही इसॅ भौतिक संसार के कष्टों से मुक्त कर देता हँl अर्जून,जो लोग पूर्ण भक्ति और समर्पण के साथॅ मुझसे जुड़त है उनके लिए मै जीवन और मृत्यु के चॅक्र से मुक्ति प्रदान करता हूँl - ShareChat