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#✨આધ્યાત્મિક વિચાર📜
✨આધ્યાત્મિક વિચાર📜 - सत्सग का महत्व में सुना  एक आदमी ने सत्संग ক্ি তিমন जैसे कर्म किये हैं उसे अपने कर्मों के अनुसार वैसे ही फल भी भोगने पड़ेंगे तो ये सुनकर उसे बहुत आश्चर्य हुआ।  उसने सत्संग करने वाले संत जी से पूछा- संत जी ! अगर कर्मों का फल भोगना ही पड़ेगा तो फिर सत्संग में आने का क्या फायदा है? संत जी ने एक ईंट की तुम इस ईंट को छत पर ले तरफ इशारा करके कहा- जाकर मेरे सर पर फेंक दो। आदमी बोला- संत जी ! इससे तो आपको चोट लगेगी और दर्द भी होगा संत जी ने कहा- अच्छा। फिर उसे उसी ईंट के भार के बराबर का रुई का गट्ठा बांध कर दिया और कहा- अब इसे ले जाकर मेरे सर पर फैंकने से भी क्या मुझे चोट लगेगी? वो बोला- नहीं। संत जी ने कहा- बेटा! इसी तरह सत्संग में आने से इंसान को अपने कर्मों का बोझ हल्का लगने लगता है और वो हर दुख तकलीफ को परमात्मा की दया समझकर बड़े प्यार से सह लेता है। सत्सग का महत्व में सुना  एक आदमी ने सत्संग ক্ি তিমন जैसे कर्म किये हैं उसे अपने कर्मों के अनुसार वैसे ही फल भी भोगने पड़ेंगे तो ये सुनकर उसे बहुत आश्चर्य हुआ।  उसने सत्संग करने वाले संत जी से पूछा- संत जी ! अगर कर्मों का फल भोगना ही पड़ेगा तो फिर सत्संग में आने का क्या फायदा है? संत जी ने एक ईंट की तुम इस ईंट को छत पर ले तरफ इशारा करके कहा- जाकर मेरे सर पर फेंक दो। आदमी बोला- संत जी ! इससे तो आपको चोट लगेगी और दर्द भी होगा संत जी ने कहा- अच्छा। फिर उसे उसी ईंट के भार के बराबर का रुई का गट्ठा बांध कर दिया और कहा- अब इसे ले जाकर मेरे सर पर फैंकने से भी क्या मुझे चोट लगेगी? वो बोला- नहीं। संत जी ने कहा- बेटा! इसी तरह सत्संग में आने से इंसान को अपने कर्मों का बोझ हल्का लगने लगता है और वो हर दुख तकलीफ को परमात्मा की दया समझकर बड़े प्यार से सह लेता है। - ShareChat