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#🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍गुलजारांचे साहित्य
🖋शेरो-शायरी - 4 अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही निकले जितनों को गले लगाया था ...!! 0 4 अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही निकले जितनों को गले लगाया था ...!! 0 - ShareChat