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Aachrya parsant - धर्म है स्वयं को देखना। सुबह से शाम तक क्या कर रहे हो? सोच रहे हो? 41 अनुभव कर रहे हो? 41 क्या महसूस कर रहे हो? किधर को भग लिए? किन शब्दों का चयन कर रहे हो? किससे रिश्ता बना रहे हो? क्या खा रहे हो? कहाँ बेईमानी की? कहाँ बहुत ज़ोर लगा दिया? यही सब देखना होता है और जब इसको देखो নী পনা বলনা & बडा अंधकार है! ೫ದಣiq धर्म है स्वयं को देखना। सुबह से शाम तक क्या कर रहे हो? सोच रहे हो? 41 अनुभव कर रहे हो? 41 क्या महसूस कर रहे हो? किधर को भग लिए? किन शब्दों का चयन कर रहे हो? किससे रिश्ता बना रहे हो? क्या खा रहे हो? कहाँ बेईमानी की? कहाँ बहुत ज़ोर लगा दिया? यही सब देखना होता है और जब इसको देखो নী পনা বলনা & बडा अंधकार है! ೫ದಣiq - ShareChat