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खुद को अक्सर तन्हा पाया है। #📖 कविता और कोट्स✒️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
📖 कविता और कोट्स✒️ - मिथ्था लगता यह जग सारा, रिश्तों ्में यह्ी छल्ावा है। स्वार्थ की धूप में जळक२, विश्व्रास अब म्ुखझ्ाया है०० स्मरझें , श्योगी॰ किसे अपना 8745j} & &R4 % 80| ्ं, खुदु ag ೫3 31 #ತ  த 3R a "ூல 800 rgaik fJaR} "zil | Your uote.in मिथ्था लगता यह जग सारा, रिश्तों ्में यह्ी छल्ावा है। स्वार्थ की धूप में जळक२, विश्व्रास अब म्ुखझ्ाया है०० स्मरझें , श्योगी॰ किसे अपना 8745j} & &R4 % 80| ्ं, खुदु ag ೫3 31 #ತ  த 3R a "ூல 800 rgaik fJaR} "zil | Your uote.in - ShareChat