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#गुलजार शायरी
गुलजार शायरी - आशियाने बनाएं भी तो कहां बनाएं " साहब" ज़मीने महंगी हो गयी और दिल में कोई जगह नहीं देता !! आशियाने बनाएं भी तो कहां बनाएं " साहब" ज़मीने महंगी हो गयी और दिल में कोई जगह नहीं देता !! - ShareChat